'पुलिसवालों ने रसन को चौकी के सामने रोड पर एक चादर पर बैठा रखा था। जब मैं पहुंचा तो उन्होंने उसे मेरी बाइक पर बैठा दिया। रास्ते भर वह चुप रहा। जब उसके घर के रास्ते पर उतारा, तब भी कुछ नहीं बोला। नीचे उतरते ही वह जमीन पर बैठ गया। इसके बाद लेट गया। मैंने चिल्लाकर घरवालों को बुलाया। वे आए, देखा तो रसन की सांसें थम चुकी थीं।' ये कहना है झाबुआ जिले के छनिया गांव के सरपंच तोल सिंह मुणिया का। सरपंच मुणिया वो आखिरी शख्स है, जिसने आदिवासी रसन सिंह किहोरी को जिंदा देखा था। सरपंच का कहना है कि मौत के बाद पुलिस और परिजन के बीच 40 लाख में समझौते की बात शुरू हुई जो 10 लाख पर तय हुआ। पुलिस ने 5 लाख रुपए एडवांस भी दे दिए थे। झाबुआ की हरिनगर पुलिस चौकी के स्टाफ पर आरोप है कि उन्होंने रसन सिंह को चौकी में इतना पीटा कि उसकी मौत हो गई। रविवार 28 जुलाई को आदिवासियों ने पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर चौकी के बाहर जमकर हंगामा किया था। पुलिस पहले रसन को चौकी लाने की बात से इनकार करती रही, बाद में दैनिक भास्कर से बात करते हुए एएसपी ने कहा, 'रसन को एक मामले में पूछताछ के लिए चौकी लाया गया था। पूछताछ के बाद जब उसे सरपंच के सुपुर्द किया था, तब वह ठीक था और बातचीत कर रहा था। हमने उसका वीडियो भी जारी किया है। बाद में क्या हुआ, हमें नहीं पता?' रसन सिंह की संदिग्ध मौत और परिजन के आरोप के बाद भास्कर की टीम छायन गांव पहुंची तो पता चला कि उसके बेटे कुशल सिंह किहोरी के नाम से पुलिस ने वारंट जारी किया था, जब वो नहीं मिला तो रसन को उठाकर ले गई। उसके बाद क्या हुआ, पढ़िए पूरी रिपोर्ट... दरवाजा तोड़कर सोते से उठा ले गई पुलिस भास्कर की टीम जब रसन सिंह के घर पहुंची तो उसकी दोनों पत्नियां रूपा और हुमा किहोरी मिलीं। दोनों के 7 बेटे और एक बेटी हैं। बच्चों के भी बच्चे हो चुके हैं। रसन सिंह किहोरी जब जिंदा था, तब 22 लोगों का परिवार था। रूपा ने बताया कि हमारे पास 25 बीघा खेती है। कपास और मक्का की खेती करते हैं। पैसा देकर दूसरे लोगों की जमीन भी खेती के लिए ली है। रूपा कहती है कि 20 किमी की दूरी पर गुजरात की सीमा है। ऐसे में इस गांव के लोग अक्सर काम करने गुजरात चले जाते हैं। रसन सहित बच्चे भी मजदूरी करने गुजरात जाते रहते हैं। रूपा और हुमा से सवाल किया कि पुलिस रसन सिंह को उठाकर क्यों ले गई थी? दोनों ने बताया, 27 जुलाई की रात 11-12 बजे के बीच हरिनगर चौकी के 4 पुलिसवाले आए। घुसते ही घर की तलाशी लेने लगे। दूसरे घर के एक कमरे में रसन सो रहा था। दरवाजा अंदर से बंद था। पुलिसवाले दरवाजा तोड़कर उसे सोते हुए बिस्तर से उठाकर ले गए। हम लोगों के साथ भी मारपीट की थी। हुमा ने वो कमरा और टूटा हुआ दरवाजा भी दिखाया। इससे साफ है कि पुलिस तो आई थी और दरवाजा भी तोड़ा था। चाची से था जमीन का विवाद, भील पंचायत में हो गया था समझौता पुलिस रसन को क्यों उठा ले गई, इसका जवाब दूसरी पत्नी हुमा के बड़े बेटे गुलाब ने दिया। कहा- पड़ोस में काकी नूरा किहोरी और उनका परिवार रहता है। 20 दिन पहले हमारा रास्ते को लेकर उनसे विवाद हुआ था। दरअसल, नूरा के घर से होकर रसन के घर का रास्ता है। ये काफी संकरा है। बारिश में दिक्कत होती है। इसे लेकर रसन के बेटे कुशाल ने काकी नूरा से रास्ते के लिए जमीन देने की बात कही थी। उनके बीच कहासुनी हो गई। कुशाल ने नूरा को थप्पड़ मार दिया था। नूरा ने इसकी शिकायत हरिनगर चौकी में की थी। हालांकि, बाद में भील पंचायत में समझौता हो गया था। रास्ते की जमीन के एवज में जो लेन-देन करना था, वो कर दिया गया था। नूरा ने शिकायत भी रसन किहोरी की बजाय उसके बेटे कुशाल किहोरी के खिलाफ की थी। आरोप- रसन घर आया, तब उसके सिर पर चोट थी परिजन के मुताबिक, रसन को लेकर पुलिसवाले गुजरात सीमा तक गए थे। इसके बाद चौकी ले गए। वहां से रात 2 बजे पुलिसवालों ने कॉल कर कहा- रसन को ले जाओ। रसन की पत्नी हुमा ने बताया कि इतनी रात में हम लोग चौकी जाने में डर रहे थे, क्योंकि यहां पुलिस अक्सर किसी को भी फंसा देती है। रात 2 बजे के लगभग गांव के सरपंच तोल सिंह मुणिया ने आवाज देकर बुलाया। उनके साथ रसन भी था। हम दौड़कर पहुंचे, तब तक रसन गिर गए। देखा तो उसकी सांसें थम चुकी थीं। सिर के पीछे चोट लगी थी। नाक, कान और मुंह से खून निकला हुआ था। कमर के नीचे भी लाठी-डंडे से मारपीट के निशान थे। हुमा सवाल करती है कि रसन के सिर और कमर के नीचे चोट कैसे आई? जाहिर सी बात है कि पुलिस ने ही उसकी पिटाई की। जब हालत बिगड़ी तो सरपंच को बुलाया और घर भिजवा दिया। सरपंच बोला- पुलिस ने 10 लाख में समझौता किया, एएसपी का इनकार रसन सिंह किहोरी की मौत की खबर लगते ही हरिनगर चौकी खाली हो गई। सभी पुलिसकर्मी फरार हो गए। 28 जुलाई की सुबह परिजन रसन का शव लेकर गांववालों के साथ चौकी पहुंचे। चौकी में हंगामे की खबर पर एएसपी प्रेमलाल कुर्वे की अगुवाई में एसडीओपी थांदला सहित 3 थानों का पुलिस बल पहुंचा। रसन की मौत से गुस्साए परिजन और पुलिस के बीच घंटों बहस चली। सरपंच तोल सिंह मुणिया ने बताया कि 40 लाख रुपए मुआवजा से शुरू हुई बातचीत आखिरी में 10 लाख रुपए पर खत्म हुई। फिलहाल, परिजन को पुलिस की ओर से 5 लाख रुपए दिए गए हैं। ये रकम पुलिस ने खुद दिए या कहीं और से दिलाए, ये स्पष्ट नहीं हो पाया है। दूसरी तरफ, एएसपी प्रेमलाल कुर्वे ने ऐसी किसी बातचीत को खारिज किया है। कुर्वे ने कहा कि आदिवासी इलाकों में विवाद को सुलझाने की भांजगड़ा प्रथा है, इसलिए हर कोई इस प्रथा की आड़ में पैसा चाहता है। कुशाल की बाइक और मोबाइल के एवज में पुलिस मांग रही थी 60 हजार: परिजन रसन के दूसरे बेटे गुलाब ने हरिनगर चौकी की पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ दिन पहले पुलिस उसके भाई की बाइक और मोबाइल किसी मामले में जब्त कर ले गई थी। इन्हें लौटाने के एवज में पुलिस 60 हजार रुपए मांग रही थी। इस आरोप से भी पुलिस इनकार कर रही है। एएसपी प्रेमलाल कुर्वे कहते हैं कि ऐसी कोई बात थी तो परिजन को वरिष्ठ अधिकारियों तक शिकायत करनी थी। उधर, परिजन का कहना है कि अधिकारी अब ऐसा कह रहे हैं। कभी उनसे बात करो तो डांटकर भगा देते हैं। अब तक बाइक और मोबाइल नहीं लौटाए गए हैं। पीएम रिपोर्ट नहीं आई, चौकी का पूरा स्टाफ बदल गया 28 जुलाई को हंगामे के बाद पुलिस ने रसन का पोस्टमार्टम डॉ. सोबन बबेरिया, डॉ. रोहित मुजाल्दे और डॉ. चिराग चौहान का पैनल बनाकर कराया था। थांदला के सीबीएमओ डॉ. बीएस डावर ने कहा कि विसरा प्रिजर्व कर पुलिस को सौंप दिया है। इसकी जांच एफएसएल इंदौर से होगी। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वजह स्पष्ट हो पाएगी। ग्रामीणों के हंगामे की खबर के बाद डीआईजी निमिष अग्रवाल भी हरिनगर चौकी पहुंचे थे। आरोप लगने के बाद चौकी का पूरा स्टाफ बदल दिया गया। अब एएसआई मुकेश कुमार वर्मा को चौकी प्रभारी बनाया गया है। सरपंच बोले- पुलिस ने रात तीन बजे मुझे कॉल कर बुलाया था छायन गांव के सरपंच तोल सिंह मुणिया इस मामले के प्रत्यक्षदर्शी हैं। हरिनगर चौकी की पुलिस ही रसन को लेकर गई थी, वो उसके गवाह भी हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहा- 27 जुलाई की देर रात 3 बजे के लगभग हरिनगर चौकी प्रभारी का कॉल मेरे मोबाइल पर आया था। रिसीव किया तो कहा गया कि आकर रसन को ले जाओ, उसके घर वाले नहीं आ रहे हैं। मैं बाइक से उसी समय चौकी पहुंचा। लगभग 20 मिनट लगे होंगे। वहां से घर ले आया।