मध्य प्रदेश के 5 जिलों के 25 कॉन्स्टेबल को एक हफ्ते के भीतर सस्पेंड कर दिया गया है। इन आरक्षकों की गलती सिर्फ इतनी थी कि उन्होंने 15 अगस्त की परेड के लिए बैंड प्रशिक्षण में जाने से मना कर दिया था। ऐसा पहली बार हुआ है जब एक साथ हर जिले में इतनी बड़ी संख्या में कॉन्स्टेबल को सस्पेंड किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आदेश का पालन नहीं करने पर यह एक्शन लिया गया है, वहीं कॉन्स्टेबल का तर्क है- हमारी भर्ती जनरल ड्यूटी के लिए हुई थी, बैंड बजाने के लिए नहीं। बहरहाल, निलंबन की कार्रवाई के बाद भास्कर ने 5 में से 4 जिलों के 10 निलंबित पुलिस आरक्षकों से बात की। जाना कि बैंड दल प्रशिक्षण में उपस्थित क्यों नहीं हुए? सभी 5 जिलों- रायसेन, मंदसौर, खंडवा, हरदा और सीधी के एसपी से पूछा कि जवानों के बैंड दल प्रशिक्षण में नहीं जाने पर उन्हें सस्पेंड क्यों किया गया। पड़ताल में कई बातें पता चलीं। जैसे कि ये मामला दो बार कोर्ट तक जा चुका है। वहीं पुलिस मुख्यालय ने तीन बार इसे लेकर अलग-अलग आदेश दिए हैं। आइए, एक-एक कर सभी पर चलते हैं.. पूरे मामले को शुरुआत से समझते हैं… साल 2023 के अंत यानी 13 दिसंबर को मोहन यादव मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने तमाम तरह के फैसले लिए। तीसरे दिन लिए गए कुछ फैसलों में एक फैसला ये भी था कि मध्य प्रदेश के हर जिले में पुलिस बैंड की स्थापना की जाए। सीएम के आदेश के बाद पुलिस हेड क्वार्टर, भोपाल से एडीजी साजिद फरीद शापू ने 18 दिसंबर को सभी जिलों के एसपी के नाम आदेश जारी किया। आदेश में लिखा था कि हर जिले में पुलिस बैंड की स्थापना की जानी है। अपनी इकाई में पदस्थ आरक्षक से लेकर एएसआई रैंक तक के कर्मियों की सूची 25 दिसंबर तक विशेष सुरक्षा बल मुख्यालय तक आवश्यक तौर पर भेजें। भेजे गए नाम ऐसे होने चाहिए जो 45 वर्ष की उम्र से कम हों। साथ ही वो बैंड दल में शामिल होने के इच्छुक हों। इनकी लिखित सहमति के आवेदन पत्र के साथ ही इनकी सूची विशेष सुरक्षा बल मुख्यालय को भेजी जाए। इस आदेश के बाद 10 जनवरी से इंदौर, भोपाल और जबलपुर में 90 दिवसीय प्रशिक्षण की शुरुआत हो गई। इस प्रशिक्षण में प्रदेशभर की तमाम बटालियन के 330 शामिल हुए। आदेश को आरक्षकों ने कोर्ट में चुनौती दी, कोर्ट ने लगाया स्टे पहले आदेश के बाद दो और आदेश जारी हुए थे। एक आदेश 31 दिसंबर को और दूसरा 9 फरवरी को। इसमें साफ शब्दों में लिखा था कि जो भी जवान बैंड दल जॉइन करने के इच्छुक हों, उनके नाम की सूची ही आगे बढ़ाई जाए। आदेश के बावजूद कुछ जिलों के एसपी ने आरक्षकों को बगैर उनकी सहमति के बैंड दल में नॉमिनेट कर दिया। इसके खिलाफ मंदसौर, रतलाम, राजगढ़, गुना, भिंड, ग्वालियर, मुरैना, नीमच, शिवपुरी, शाजापुर, देवास जिलों के करीब 29 आरक्षकों ने हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में याचिका दायर कर दी। आरक्षकों की तरफ से दायर याचिका में वकीलों ने दलील दी कि आरक्षकों ने बैंड दल में जाने की इच्छा नहीं जताई है। न ही कोई लिखित सहमति दी। इसके बावजूद इन्हें बैंड दल में शामिल होने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। इन दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने इस पर स्टे लगा दिया। बाकी के जवान प्रशिक्षण लेते रहे। ग्वालियर हाईकोर्ट ने अपने आदेश में लिखा- संगीत देवदूतों की भाषा है इसके बाद मई में मुरैना के 5 आरक्षकों ने इसी तरह की याचिका ग्वालियर हाईकोर्ट में दायर की। इसमें उन्होंने उसी आदेश का हवाला देते हुए लिखा कि उन्होंने बैंड प्रशिक्षण के लिए सहमति नहीं दी, इसके बाद भी उनका नाम बैंड दल में नॉमिनेट किया गया। सरकार की तरफ से पैरवी करते हुए एडवोकेट नीलेश सिंह तोमर ने कोर्ट को बताया कि पुलिस विभाग ने पहले सहमति का कॉलम रखा था, लेकिन किसी ने भी प्रशिक्षण के लिए लिखित सहमति नहीं दी। इसके बाद विभाग ने तय किया कि किसी की सहमति नहीं ली जाएगी और बगैर सहमति के ही ट्रेनिंग लिस्ट तैयार की जाएगी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद ग्वालियर हाईकोर्ट ने अपने आदेश में लिखा कि संगीत देवदूतों की भाषा है। सरकार ने हर जिले में पुलिस बैंड के गठन का फैसला कम्युनिटी पुलिसिंग को ध्यान में रखकर किया है, इसमें कुछ गलत नहीं है। ये प्रशिक्षण पुलिस जवानों के स्किल डेवलपमेंट के लिए है। 15 अगस्त के लिए निकले आदेश में लिखित सहमति वाली बात नहीं लिखी स्वतंत्रता दिवस करीब आते ही, पुलिस मुख्यालय से फिर आदेश जारी हुआ। आदेश में जिलों के एसपी को प्रशिक्षण के लिए नए बैंड वादक कर्मियों को आवंटित इकाइयों में अभ्यास में भेजने के आदेश दिए गए। ताकि हर जिले में 15 अगस्त की परेड में उच्च स्तरीय बैंड का प्रदर्शन हो सके। आदेश में कर्मचारियों की इच्छा होने की बात नहीं लिखी थी। इसके बाद तमाम जिलों के एसपी ने कर्मियों को नॉमिनेट कर अभ्यास जॉइन करने के आदेश जारी किए। इसके बाद जिन आरक्षकों ने अभ्यास जॉइन नहीं किया उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। आरक्षकों ने कहा- बैंड बजाएंगे तो शादी नहीं होगी, सामाजिक दबाव भी रहता है दैनिक भास्कर ने आरक्षकों से बात की, उन्होंने नाम न बताने की शर्त पर अपनी बातें रखीं। इसलिए हम उनका नाम नहीं लिख रहे हैं। कॉन्स्टेबल 1: मैं आर्थिक तौर पर कमजोर हूं, लेकिन नौकरी बचाने के लिए अपनी इच्छा के विरुद्ध कोई काम नहीं कर सकता। परीक्षा पास कर कॉन्स्टेबल बना हूं। मैं बैंड बजाने के लिए पुलिस में नहीं आया था। इसलिए नहीं गया। कॉन्स्टेबल 2: मैं अपने जिले में बैंड दल में शामिल हो जाऊंगा तो समाज में मेरी बदनामी होगी। मेरी शादी तक में अड़चन आएगी। कॉन्स्टेबल 3: हम नए आरक्षक भर्ती हुए हैं। अभी 48 साल की नौकरी बाकी है। एक बार बैंड प्रशिक्षण का टैग लग गया तो जीवन भर बैंड बजाते रहेंगे। बार-बार हमें ही बैंड बजाने के लिए भेजा जाएगा। हमने इसके लिए जीडी की परीक्षा पास नहीं की थी। कॉन्स्टेबल 4: मेरी पत्नी और परिवार ने साफ मना कर दिया था कि मैं बैंड दल जॉइन न करूं। उनकी इच्छा के विरुद्ध नहीं जा सकता। मैं खुद भी नहीं जाना चाहता, मैं थाने में तैनात कॉन्स्टेबल हूं। कॉन्स्टेबल 7: ये हमारी विभागीय प्रक्रिया है। बड़े अधिकारी जो आदेश करते हैं, हमें उसका पालन करना होता है। हमें निलंबित किया गया। इस आदेश का पालन करूंगा। परेड में शामिल न होने का मेरा निजी कारण था। वो मैं अपने विभाग को बताऊंगा। मुझे शामिल होने के लिए पहले आदेश नहीं दिए गए। मेरी इच्छा भी नहीं पूछी गई थी। इस बारे में मैं मीडिया में कुछ ज्यादा नहीं बोल पाउंगा। कॉन्स्टेबल 8: हमसे बिना पूछे आदेश जारी कर कहा गया था कि आपको बैंड वादन प्रशिक्षण में जाना है। हमने जाने से मना कर दिया। लेकिन कुछ पुराने आरक्षक थे, उनको सामने खड़ा कर अधिकारियों द्वारा धमकाया गया कि बैंड में जाओगे या सस्पेंड करें। इस डर से कुछ लोग चले गए। कॉन्स्टेबल 9: मंदसौर में तो 10 आरक्षकों को सस्पेंड कर दिया गया है। पहले 4 आरक्षकों को बैंड वादन प्रशिक्षण में न जाने के कारण सस्पेंड किया गया। इसके बाद कुछ अन्य आरक्षकों को बिना आदेश जारी किए लाइन में खड़ा कर कहा कि प्रशिक्षण में जाएंगे, जिसने मना कर दिया। उन्हें तुरंत निलंबित कर दिया गया। कॉन्स्टेबल 10: हमें फिजिकली कहा गया था कि बैंड दल के साथ भीड़ बढ़ाने के लिए आपको भेजा जा रहा है। उनके साथ परेड करनी होगी। आपकी ड्रेस बैंड टोली की तरह ही सफेद रहेगी। इस बात से भी कई कॉन्स्टेबल में नाराजगी थी। उन्हें और उनके परिवार को इससे आपत्ति थी। 5 में से 2 जिलों के एसपी ने बोला- नो कमेंट विकास सहवाल, एसपी, रायसेन: बैंड नहीं, परेड में नहीं जाने के लिए किया सस्पेंड रायसेन एसपी विकास कुमार सहवाल ने कहा, हमें बैंड के लिए ट्रेड से भर्ती हुए 10 जवान पहले ही मिल गए थे। हमने जिन आरक्षकों को सस्पेंड किया है वो आदेश का पालन न करने और अनुशासनहीनता के लिए किया है। हमने उन्हें परेड के प्रशिक्षण के लिए जाने के लिए आदेशित किया था वो नहीं पहुंचे। हालांकि एसपी को इस बात की जानकारी नहीं थी कि जवानों को परेड प्रशिक्षण के लिए कहां जाना था। उन्होंने कहा यहीं लोकल में कहीं जाना था। भास्कर रिपोर्टर ने निलंबन आदेश का जिक्र किया और बताया कि जवानों को 15वीं बटालियन इंदौर प्रशिक्षण के लिए भेजा जाना था। तो बोले कि कोई मिस्टेक हो गई होगी मैं चेक कराता हूं। रविंद्र वर्मा, एसपी, सीधी: निलंबन के पीछे और भी दूसरे कारण हैं हमने अनुशासनहीनता और गुटबाजी करने के चलते आरक्षकों को निलंबित किया है। हालांकि इसका आधार बैंड दल प्रशिक्षण है, लेकिन निलंबन की मुख्य वजह यह नहीं है। हमने तीनों निलंबित किए गए नए आरक्षकों के नाम अन्य आरक्षकों के साथ बैंड दल प्रशिक्षण के लिए नॉमिनेट किए थे। तीनों के अलावा बाकी जो आरक्षक प्रशिक्षण में नहीं जाना चाहते थे, उन्होंने मुख्यालय में उपस्थित होकर अपने-अपने कारण दिए। हमने उनकी बात सुनी और उनका नॉमिनेशन खत्म किया, लेकिन ये तीन आरक्षक हमारे समक्ष उपस्थित नहीं हुए। कोई कारण भी नहीं बताया। मेडिकल प्रक्रिया के दौरान भी उपस्थित नहीं हुए। मनोज राय, एसपी, खंडवा: बैंड वालों के साथ परेड में शामिल होना था हमने किसी जवान को प्रशिक्षण में भेजने का दबाव नहीं बनाया। जो जवान निलंबित हुए हैं, उन्हें समझाया था कि बैंड बजाने के प्रशिक्षण के लिए नहीं जाना है। बैंड बजा रहे जवानों के साथ सेम ड्रेस में परेड करना है। हालांकि, भास्कर ने कहा कि आदेश में तो साफ तौर पर बैंड दल प्रशिक्षण लिखा है। इस पर उन्होंने कहा कि लिखित में ऐसा ही लिखा जाएगा, लेकिन उन्हें बैंड बजाने के प्रशिक्षण के लिए नहीं भेजा जा रहा था। अभिनव चौकसे, एसपी, हरदा: इस मामले में मैंने अभी जांच बैठाई है। जिन आरक्षकों ने आदेश की अवहेलना की है उन्हें सस्पेंड किया गया है। अभी कोई कमेंट नहीं करना चाहूंगा। अनुराग सुजानिया, एसपी, मंदसौर: कैमरे पर कुछ भी बोलने के साथ ही कॉल भी नहीं उठाया। इस मुद्दे पर एक भी शब्द नहीं बोले। स्वतंत्रता दिवस के लिए पुलिस बैंड तैयार हर जिले में पुलिस बैंड की स्थापना के लिए प्रथम वाहिनी विस बल, इंदौर, 6वीं वाहिनी विस बल जबलपुर एवं 7वीं वाहिनी विसबल भोपाल के 321 जवानों को प्रशिक्षण दिया गया। 19 कर्मचारियों को एसटीसी बेंगलुरु भेजा गया था। इस तरह कुल 340 कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के बाद मध्यप्रदेश में 15 अगस्त 2024 के लिए सभी जिलों में पुलिस बैंड दल स्थापित किया गया।