शाजापुर में जैन तीर्थंकरों के आशीर्वाद से भारत भूमि पवित्र और पावन है तो जैन वीरों के गौरवमयी इतिहास ने राष्ट्र और समाज का मस्तक सम्पूर्ण विश्व में ऊंचा किया है। अगर भगवान महावीर हमारे आराध्य हैं तो जैन वंशावली को अमरता देने वाले राष्ट्र सपूत भामा शाह हमारे आदर्श हैं। अहिंसा परमो धर्म का संदेश संसार को देने के साथ राष्ट्र हित सर्वोपरि का सर्वश्रेष्ठ प्रमाण भी देने में जैन बंधु अग्रणी भूमिका निभाते हैं। यही जैन संस्कृति है और संस्कार भी। ये प्रभावी विचार विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हुकुम चंद सांवला ने गुरुवार को स्थानीय रसिकलाल मा.धारीवाल पोरवाल स्थानक भवन में उपस्थित जैन समाज-जनों के सामने व्यक्त किए। वे यहां चातुर्मास काल में विराजित पूज्य साध्वी डॉ.आदर्श ज्योति श्रीजी, डॉ.आत्मज्योति श्रीजी और डॉ.रजत ज्योति श्रीजी म.सा. के दर्शन लाभ के लिए पधारे थे। इस दौरान पचरंगी तप आराधना के रूप में मनाए जा रहे राष्ट्र संत पूज्य आचार्य आनंद ऋषीजी के 124वें जन्म महोत्सव समारोह के प्रथम दिवस धर्मसभा के मुख्य अतिथि श्री सांवला ने समाजजनों को संबोधित करते हुए कहा कि आज यदि हमारे बच्चे यह प्रश्न करें कि 1857 से 1947 तक देश की आजादी में जैन समाज का क्या योगदान था या स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में किन जैन वीरों, क्रांतिकारियों ने अहम भूमिका निभाई थी तो हम उनके सामने निरूत्तर हो जाएंगे। कारण यह कि जब हम स्वयं अपने गौरवशाली इतिहास से अनभिज्ञ हैं तो नई पीढ़ी को क्या बता पाएंगे। अतीत की विरासत को सहेजना और उसे धरोहर के रूप में सुरक्षित रखना हमारा प्रथम कर्तव्य होना चाहिए। मेरा सभी समाजजनों से व्यक्तिगत आग्रह है कि अपनी भावी पीढ़ी को जैन संस्कारों के साथ अतीत की गौरवगाथा से भी अनिवार्य रूप से परिचित करवाएं ताकि उनमें धर्म आराधना के साथ राष्ट्र भावना का भी संचार होता रहे। साध्वी मंडल के चातुर्मास के संबंध में श्री सांवला ने कहा कि बिना भाग्य के मानव जन्म नहीं होता और बिना सौभाग्य के संतों का आशीर्वाद प्राप्त नहीं होता। शाजापुर की धरती सौभाग्यशाली है। जहां के नागरिकों को चार महीने के लिए महासतियों का आशीर्वाद मिल रहा है। इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में मनोज नाहर (इंदौर) स्थानकवासी समाज के पदाधिकारी महेन्द्र कोठारी, लोकेश जैन (बंटी), पीयूष जैन, राजेंद्र जैन तथा संजय जैन ने श्री सांवला का शाल-श्रीफल भेंट कर आत्मीय बहुमान किया। संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन अजित जैन ने किया और अंत में आभार दिलीप जैन ने माना। पचरंगी तप आराधना के अंतर्गत प्रथम दिवस 51 हजार समवशरण नवकार मंत्र जाप का आयोजन महासतियों की पावन निश्रा में आयोजित हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में हिंदू संगठनों के पदाधिकारी तथा समाजजन उपस्थित रहे।