कहानियां नैतिक शिक्षा प्राप्त करने का सशक्त माध्यम है। कहानियां सभी आयु वर्गो को प्रभावित करती हैं। जब कहानियां मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखी गयी हों तो उन्हें पढ़कर एक विशेष अनुभूति होती है। मुंशी जी की कहानियों में ग्राम्य जीवन साकार हो उठता है। मुंशी जी ने जिस तरह ग्रामीण परिवेश को अपनी कहानियों का आधार बनाया है वह अद्भुत है। तत्कालीन ग्राम्य समाज की वास्तविकता समझना हो तो मुंशी प्रेमचंद एक आदर्श साहित्यकार हैं। जय हिन्द सखी मंडल द्वारा मुंशी प्रेमचंद जयंती के अवसर पर महारानी चिमनाबाई शा.क.उ.मा.वि. में एक कहानी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। अतिथि के रूप में उक्त विचार व्यक्त करते हुए शिक्षाविद और पूर्व प्रशासनिक अधिकारी जी.एल.व्यास ने कहा कि कहानी भावों की भाषा है। वरिष्ठ लेखक मोहन वर्मा ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद की कहानियां कालजयी हैं। मुंशी प्रेमचंद की कहानियां यथार्थ सत्य है। मुंशी जी की कहानियां पाठ्यक्रम का नहीं जीवन का हिस्सा है। प्रतियोगिता में रहनुमा शेख हाई स्कूल नागदा, रोशनी साहू चिमनाबाई, दुर्गा चौहान उत्कृष्ट विद्यालय देवास, युवराज ठाकुर ना.वि.मं. क्र. 1, तनुज मालवीय नूतन उ.मा.वि. और खुशी देवड़ा महारानी राधाबाई स्कूल देवास ने मुंशी प्रेमचंद लिखित कहानियां सुनाकर सहभागिता की। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान रोशनी साहू, द्वितीय स्थान दुर्गा चौहान और तृतीय स्थान युवराज ठाकुर ने प्राप्त किया। विशेष पुरस्कार खुशी देवड़ा, रहनुमा शेख ओर तनुज मालवीय को संयुक्त रूप से प्रदान किया गया। सभी प्रतिभागियों को मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित कहानियों की पुस्तकें भेंट की गई।